MP: अल्पसंख्यक स्कॉलरशिप के नाम पर हुआ करोड़ों रुपए का घोटाला

 MP: अल्पसंख्यक स्कॉलरशिप के नाम पर हुआ करोड़ों रुपए का घोटाला
निजी शैक्षणिक संस्थाओं से सांठ-गांठ कर अधिकारी हड़प  गए स्टूडेंट्स की स्कॉलरशिप



भोपाल। प्रदेश भर के गरीब अल्पसंख्यक छात्रों को दी जाने वाली स्कॉलरशिप में करोड़ों रुपए का खेल खेला जा रहा है। पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभागीय सचिव रमेश थेटे ने प्रदेश की शासकीय शैक्षणिक संस्थाओं को दी जाने वाली छात्रवृति राशि पीजीडीएम (पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा मैनेजमेंट कोर्स) कराने वाली प्राइवेट संस्थाओं के खाते में सीधे 330 करोड़ रुपए की राशि डाल दी। जबकि नियमों के मुताबिक स्कॉलरशिप की राशि छात्र-छात्राओं के बैंक खाते में सीधे ट्रांसफर की जाती है। इतना ही नहीं विभागीय सचिव ने निजी संस्थाओं के खाते में राशि ट्रांसफर करने से पहले विभागीय मंत्री आरिफ अकील से भी अनुमोदन लेना उचित नहीं समझा।
वहीं पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विद्यार्थी की नियमित स्कॉलरशिप शैक्षणिक सत्र 2018-19 समाप्त होने को है और वर्ष 2020 का प्रारंभ होने के बाद भी संचालनालय आयुक्त पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा राशि नहीं भेजे जाने से शासकीय संस्थाओं के अल्पसंख्यक छात्र वंचित हैं। अब विभाग ने शासकीय स्कूलों के नियमित छात्रों को स्कॉलरशिप देने के लिए वित्त विभाग से सप्लीमेंट्ररी बजट मांगने की तैयारी कर ली है। इधर, इस मामले में शिकायतकर्ता नवीन दुबे और अमित दुबे की शिकायत के आधार ईओडब्ल्यू प्रकरण दर्ज जांच कर रहा है।

नियमों को ताक पर रख बढ़ाई छात्रवृति की राशि
विभागीय सूत्रों ने बताया कि प्राथमिक जांच में सामने आया है कि छात्रवृति राशि में नियमों को ताक पर रख वृद्धि की गई है। पीजीडीएम कोर्स में मप्र शासन द्वारा एसटी, एससी और ओबीसी के विद्यार्थियों को साल 2016 तक 7 हजार रुपए प्रति विद्यार्थी छात्रवृति दी जाती है। परंतु विभागीय अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रख साल 2016-17 से पीजीडीएम कोर्स की छात्रवृति राशि बढ़ाकर 17 हजार रु. की। जबकि शासन द्वारा अभी तक किसी भी कोर्स में छात्रवृति राशि में बढ़ोतरी नहीं की गई है।

एक ही परिसर में हो रहा कई कॉलेजों का संचालन
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि विभाग द्वारा जिन प्राइवेट संस्थाओं को राशि आवंटित की गई है। उनमें से अधिकतर कॉलेजों का संचालन एक ही परिसर में किया जा रहा है। जो कि एआईसीटीई और यूजीसी के नियमों के खिलाफ है। फिर इन संस्थाओं को बैंक खातों में सीधे राशि ट्रांसफर की गई है। यह भी सामने आया है कि सत्र 2019-20 में सिर्फ  पीजीडीएम कोर्स कराने वाली प्राइवेट संस्थाओं के अलावा अन्य किसी भी कोर्स की छात्रवृति का भुगतान नहीं किया गया है।

संस्थाओं के खाते में भेजी राशि
नियम है कि छात्रवृत्ति की राशि छात्र के खाते में ट्रांसफर की जाए, लेकिन यहां संस्थाओं के खाते में राशि षड्यंत्र के तहत भेजी गई। यह राशि संस्था के जवाबदेह अधिकारियों ने आहरित भी कर ली। बगैर मूल ट्रांसफर सॢटफिकेट(टीसी) के छात्रों को अपनी संस्था में प्रवेशित एवं नियमित छात्र बताकर छात्रवृत्ति स्वीकृत कराई गई।

ये संस्थाएं जांच के दायरे में
– सफायर इंस्टिट्यूट ऑफ  बिजनेस मैनेजमेंट, इंदौर
– सफायर इंस्टीट्यूट ऑफ  मैनेजमेंट, इंदौर
– संघवी इंस्टीट्यूट ऑफ  बिजनेस मैनेजमेंट, इंदौर
– आईएमआई कॉलेज, इंदौर
– इंदौर इंदिरा कॉलेज, इंदौर
– सफायर इंस्टीट्यूट ऑफ  मैनेजमेंट स्टडीज, इंदौर
– न्यू एरा कॉलेज ऑफ  मैनेजमेंट, इंदौर
– रेनासेंस विश्वविद्यालय, इंदौर
– सीएच इंस्टिट्यूट ऑफ  बिजनेस स्टडीज, इंदौर
– साहिब इंस्टीट्यूट ऑफ  मैनेजमेंट स्टडीज, इंदौर
– आईएसबीए कॉलेज, इंदौर
– विक्रांत इंस्टीट्यूट ऑफ  बिजनेस मैनेजमेंट, इंदौर
– विक्रांत इंस्टीट्यूट ऑफ  बिजनेस मैनेजमेंट, ग्वालियर
– ड्रीम वैली कॉलेज, ग्वालियर
– आईपर कॉलेज, भोपाल
– वीएनएस बिजनेस स्कूल, भोपाल


स्कॉलरशिप में घोटाला होने की शिकायत मिली है। इस शिकायत के आधार जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही छात्रवृति की राशि भी उनसे वसूली जाएगी।
(आरिफ अकील, पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, मंत्री)

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